देवर जी, हां तो आगे चले।

August 2, 2009

मेरी भाभी की उम्र 21 साल की थी, और मैं 18 साल का था। भाभी ने बीए फ़ाईनल की परीक्षा दी थी और मुझे रिजल्ट लेने भाभी के साथ उज्जैन जाना था। उज्जैन में ही कुछ ऐसा हुआ कि मैं और भाभी बहुत ही खुल गए।

मैं और मेरी भाभी रतलाम से सवेरे रवाना हो कर उज्जैन आ चुके थे। स्टेशन पर उतरते ही सामने एक होटल में रूम बुक करा लिया। कमरा अच्छा था। डबलबेड टेबल बाथरूम सभी कुछ साफ़सुथरा था। मैंने और भाभी ने स्नान किया और यूनिवरसिटी रवाना हो गये। वहां से हमने भाभी का रिजल्ट कार्ड लिया। दिन भर उज्जैन के पवित्र स्थलों के दर्शन किये और होटल वापस आ गये। शाम को हमारे पास कोई काम नहीं था।

अचानक भाभी बोली- चलो पास में पिक्चर हॉल है …चलते हैं, थोड़ा समय पास हो जायेगा।

हम दोनों हॉल में पहुँच गये। कोई अंग्रेजी फ़िल्म थी।

पर वह फ़िल्म बहुत सेक्सी निकली। बहुत से सीन चुदाई के थे उसमें ! थोड़ी थोड़ी देर में नंगे और चुदाई के सीन आ जाते थे। पर ये सीन ऐसे थे कि अंधेरे में फ़िल्माये गये थे, पर ये सीन इस तरह फ़िल्माये गये थे कि लण्ड और चूत के अलावा सब दिख रहा था।

जब सीन आते तो भाभी मुझे तिरछी नजर से देखने लगती। भाभी की कम उम्र थी, और उस पर इन दृष्यों का सीधा असर हो रहा था और उसकी जवानी का उबाल बेलगाम था। थोड़ी थोड़ी देर में वो मुझे छूने लगी फिर मुझ पर उसका असर देखती। मैं भी कम उम्र का ही था…

भाभी गरम होती जा रही थी। भाभी ने जब मेरी तरफ़ से कोई ऑब्जेक्शन नहीं पाया तो तो वो आगे बढ़ी और मेरे हाथ पर अपना हाथ धीरे से रख दिया। मैंने भाभी की तरफ़ देखा तो उसकी बड़ी बड़ी गोल आंखे मुझे ही देख रही थी। हम दोनों की नजरें मिली और हम आंखों ही आंखों में देखते हुए एक दूसरे में खोने लगे। उसका हाथ मेरे हाथ को दबाने लगा। मैं एक बार तो सिहर उठा। मैंने भी अब उत्तर में उसका हाथ दबा लिया।

मेरा लण्ड भी अब उठने लगा था, पर भाभी बहुत ही गरम हो चुकी थी। उसने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया और लण्ड की तरफ़ बढ़ने लगी और अपनी आंख से इशारा किया…

मेरा दिल धड़क उठा। उसने अचानक ही मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया और अंगुलियों से उसे दबा दिया।

“हाय रे !” मेरे मुख से सिसकारी निकल पड़ी।

“क्या हुआ?” उसने और जोर से दबाते हुए कहा।

सेक्सी सीन परदे पर आ जा रहे थे।

“मजा आया ना !” भाभी ने फ़ुसफ़ुसाते हुए पूछा।

मैंने भी हाथ उसकी पीठ पर से सरकाते हुए उसके बोबे थाम लिये और हौले हौले से सहलाने लगा। उसके भरे हुए मांसल बोबे और निपल उत्तेजना से कड़े हो कर तन गये थे।

“तुम्हें भी मजा आया भाभी?”

“हां रे…बहुत मजा आ रहा है।” फिर मेरी ओर देख कर बोली- “अभी और मजा आयेगा, देख !” उसने मेरे लण्ड को जोर से दबा दिया। (more…)

आगे और पीछे- दोनों तरफ से)

मेरा नाम रीना शर्मा है। यह कहानी उस वक्त की है जब मेरी शादी हुए छ: महीने हो चुके थे। मैं तो शादी के पहले से ही चुदने को बेकरार रहती थी। मेरी कई सहेलियों की शादी हो चुकी थी और वे अपनी चुदाई के किस्से मुझे सुनाती रहती थीं।

सभी का कहना था कि जब चूत मैं पहली बार लँड घुसता है तो जो मजा आता है, वह मज़ा कोई लड़की बिना लँड लिये नहीं समझ सकती है। उसके बाद फिर चुदाई का आनंद तो इतना आता है कि कहना ही क्या।

उनका कहना था कि रोज रात को टाँगें फैला और उचक उचक कर लँड लेने में जो मजा आता है वो तो दुनिया की किसी चीज में नहीं है। इसके अलावा, आदमी के ऊपर चढ़ कर चोदने में भी बहुत अच्छा लगता है। यह सब सुन कर मेरा मन भी लँड की कल्पना करता रहता था। अक्सर अकेले में मैं अपनी चूत में उंगली डाल कर अँदर-बाहर करती थी और सोचती थी कि कोई मुझे चोद रहा है। इससे मुझे काफी मजा आता था और कई बार मैं झड़ भी जाती थी।

पर शादी के बाद मेरी चुदवाने की इच्छाओं पर पानी फिर गया। दरअसल मेरे पति का लँड पूरी तरह खड़ा ही नहीं हो पाता था। उन्होंने मुझे बताया कि वह तो खुद ही शादी नहीं करना चाहते थे परन्तु घर वालों के दबाव में आकर मजबूरन शादी करनी पड़ गई। वह मुझसे हमेशा कहते कि मुझे माफ कर दो।

मैं क्या कहती, अकेले चुपचाप रोती रहती थी। शादी होने के बावजूद मैं कुंवारी ही रह गई। उन्होंने मुझे कभी छुआ तक नहीं। वे जानते थे कि उनका खड़ा नहीं होता है और कहीं उनके नजदीक आने से मैं गरम हो गई तो उनके लिये मुझे सम्भालना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए वे अलग कमरे में ही सोते थे।

मेरी चूत लँड का स्वाद चखने के लिये तड़पती रहती थी। मुझसे अच्छी किस्मत तो हमारी पालतू कुतिया टिम्मी की थी। जैसे ही घर से बाहर निकलती, गली के सारे कुत्ते उसके पीछे लग जाते थे। जब देखो एक न एक कुत्ता उसके ऊपर चढ़ा ही रहता था। साली दिनभर ठुकवाकर आती थी और मुझे ऐसे देखती थी जैसे चिढ़ा रही हो। मैं सोचती कि एक कुत्ता ही पाल लूँ और उसके साथ ट्राई करूँ , पर डर लगता था कि कहीं उसका लँड मेरी चूत में फँस गया तो क्या होगा।

कई बार बैंगन, खीरा वगैरह भी प्रयोग किया पर लँड तो लँड ही होता है। वैसे मज़े के लिये मैं पागल सी होने लगी। रास्ते चलते किसी आदमी को देख कर मैं उसके लँड की कल्पना करने लगती थी, कि कैसा होगा। खड़ा हो कर कैसा दिखता होगा। मेरी चूत में जाएगा तो कैसा लगेगा। मेरी चूत में खुजली मचने लगती और चूत रस से गीली हो जाती। मैं घर पहुँचते ही सारे कपड़े उतार कर, मुठ मार के अपनी वासना की प्यास बुझा लेती थी।

मुझे सपने भी अक्सर चुदाई के ही आते हैं। सपने में बड़े और मोटे लँड वाले आदमी दिखते, जो मेरी चूत को रगड़-रगड़ कर चोदते और अपना लँड मेरी गाँड में भी डालते रहते थे। कुल मिला के स्थिति यह हो गई थी कि मुझे तो सेक्स का भूत चढ़ गया था और मैं चुदने के लिये कुछ भी करने को तैयार थी।

तभी मेरी ससुराल में एक हादसा हो गया। मेरे जेठ जो कि आर्मी में थे, एक आतंकवादी हमले में शहीद हो गये। क्रियाकर्म के बाद मेरी जिठानी सीमा हमारे साथ ही रहने चली आई। उसकी शादी मेरी शादी के एक साल पहले हुई थी, और अभी उसके कोई बच्चा नहीं था। मैं तो वैसे भी अलग कमरे में सोती थी और सीमा को अकेलापन न लगे, यह सोच कर मैंने उसके सोने का इंतज़ाम अपने साथ ही कर दिया।

कुछ दिन बाद की बात है। रात को मेरी नींद खुली तो सीमा के सुबकने की आवाज़ आ रही थी। मैं उसे सांत्वना देने लगी तो वह मुझसे लिपट कर बहुत रोई। कुछ मन हल्का होने पर वह शांत हुई, पर हम एक दूसरे से लिपटे हुए थे। उसके बदन की गरमी और खुशबू से मुझे अजीब सी फीलिंग होने लगी थी। मैंने उसे पुचकारने के बहाने अपने होंठ उसके गाल पर लगा दिए और हल्के हल्के चूमने लगी। सीमा कुछ देर चुप रही फिर एक गहरी साँस लेकर उसने अपना मुँह ऐसे घुमाया कि उसके होंठ मेरे होंठों से सट गए। हम एक दूसरे के होंठों को चूमने लगे।

फिर सीमा ने मुझे अपनी बाहों मे कस लिया और मेरे होंठों को बेतहाशा चूसने में लग गई। मेरे बदन में सेक्स का नशा छाने लगा था। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक औरत भी दूसरी औरत को इस तरह मज़ा दे सकती है। अब सीमा का हाथ मेरे ब्लाउज़ पर पहुँच चुका था और उसने एक सैकेंड में सारे हुक खोल डाले और मेरे मम्मों पर अपना हाथ रख दिया। मुझे तो जैसे करेंट लग गया, क्योंकि मुझे आज तक किसी ने ऐसे नहीं छुआ था। सीमा धीरे धीरे मेरे मम्मे सहलाने लगी। मेरे मम्मे काफी बड़े और दूध की तरह गोरे हैं।

सीमा बोली- कैसा लग रहा है?

मैंने कहा- बहुत अच्छा, आगे बढ़ो न

सीमा मेरे निप्पल अपनी उंगली और अँगूठे से मसलने लगी, फिर अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद सीमा ने मेरा निप्पल अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी, साथ ही मेरे दूसरे मम्मे को हाथ से मसलती जा रही थी। अब तो उत्तेजना मेरी चूत तक पहुँचने लगी थी। मेरी चूत गीली होने लगी। फिर सीमा ने अपना कुर्ता और ब्रा भी उतार फैंके। उसके मम्मे भी भरे पूरे थे और चूचियाँ तनी हुईं थीं। उसने अपनी छातियाँ मेरी छातियों से सटा दीं और फिर अपने होंठ मेरे होंठों से सटा दिये। हमारी चूचियाँ आपस मे टकरा रहीं थीं और हम एक दूसरे से चिपक कर बेतहाशा किस करने लगे। मेरा सारा बदन मस्ती में डूबता जा रहा था।

फिर सीमा ने मेरा हाथ अपनी छाती पर रख लिया और बोली- प्लीज़, दबाओ न !

मैं उसके मम्मों को मसलने और दबाने लगी। सीमा भी आँखे बंद करके मिंजवाने का मज़ा लेने लगी। मैंने भी सीमा का निप्पल अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

तभी सीमा ने कहा- तुम मेरे पीछे से झुक कर मेरे मम्मे चूसो जिससे मैं भी साथ में तुम्हारे मम्मे चूस सकूं।

मैंने तुरंत सीमा की बताई पोज़िशन ले ली और पीछे से उसके मुँह पर झुक कर उसके मम्मे चूसने लगी। इससे मेरे मम्मे उसके मुँह के ऊपर आ गए और वह भी नीचे से मेरे मम्मे चूसने लगी। सच बताऊँ, बहुत मज़ा आने लगा था। काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे के मम्मे चूसते रहे। मेरे निप्पल तो इतने कड़े हो गए कि उनमें दर्द होने लगा।

कुछ देर बाद मैं सीमा के बगल में आकर लेट गई। सीमा ने तुरंत मेरा पेटिकोट खोल डाला और मेरी पैंटी नीचे कर के मुझे पूरा नंगा कर दिया। मैं थोड़ा शरमा रही थी और मैंने अपने हाथ अपनी टांगों के बीच चूत पर रख लिये।

सीमा बोली- मत शर्माओ, मैं भी अपने कपड़े उतार देती हूँ।

और उसने भी अपनी सलवार पैंटी नीचे करके उतार दी। उसने अपनी चूत शेव कर रखी थी, जो बिलकुल चिकनी दिख रही थी। वैसे मेरी चूत पर भी बहुत कम बाल थे और मेरे गोरेपन के कारण मेरी चूत बहुत सुंदर थी। मेरी चूत की दोनों फाँकें उभरी पर सटी हुई थीं क्योंकि अभी तक उसमें लँड एक बार भी नहीं घुसा था। सीमा हल्के हल्के मेरी चूत को सहलाने लगी और फिर उसने चूत की दोनों फाँकों को हल्के से फैला दिया। अँदर से मेरी चूत बिल्कुल गुलाबी थी।

ऊपर चूत का दाना और नीचे टाइट छेद देख कर सीमा बोली- हाय, क्या माल है रे ! (more…)

लण्ड बाहर निकाला और

मेरा नाम राहुल है, मेरी उम्र १८ साल है।मैं रामपुर का रहने वाला हूँ। मेरे पिताजी एक अध्यापक हैं जो कि दूसरे शहर में रहते हैं। मेरी माँ का नाम मधु है और उसकी उम्र ३८ साल है परन्तु उसकी जवानी २२ साल की लड़की से कम नहीं है। चूँकि मेरे पिताजी महीने में एक बार आते हैं इसलिए मैं और मेरी माँ ही घर में रहते हैं।

एक रात जब मैं खाना खाकर सो रहा था परन्तु मुझे नींद नहीं आ रही थे, मैंने रात के एक बजे दरवाजे में हल्की सी दस्तक सुनी। मैंने माँ के कमरे की ओर देखा तो मेरी माँ चुपके से धीरे-२ दरवाजे पर गई और दरवाजा धीरे से खोला। रात के उन्धेरे में केवल जीरो पॉवर का बल्ब जल रहा था हाल में और गुलाबी रंग की मैक्सी में मधु का आधा शरीर चमक रहा था।

दरवाजा खुलते ही नारायण ने अन्दर प्रवेश किया। नारायण की उम्र ३३ साल की होगी और वो हमारे मुहल्ले में बदमाश के नाम से जाना जाता था। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ लेकिन मैं चुपचाप सब देखता रहा। अंदर आते ही मधु ने दरवाजा बंद कर दिया था और इस बीच नारायण ने मेरे माँ की मस्त गाण्ड पर हाथ फेर दिया।

नारायण ने, जो कि नशे में था, अपनी जेब से दारू के एक बोतल निकाली और मेरी माँ ने हाल में ही रखे दो गिलास ले आई। दोनों दारू का रसपान करने लगे। बीच बीच में नारायण मेरी माँ के बड़े बड़े दूधों को दबा देता था और मेरी माँ को किस कर रहा था। नशे में तो वो बड़े प्यासी लग रही थी।

मैं चुपचाप सब देख रहा था।

पीने के बाद नारायण मेरी माँ को माँ के बेड-रूम में लेकर गया और मेरी माँ को बिस्तर में बैठा दिया और अपना पैंट की चेन खोलने लगा। इतने में नारायण का मोबाइल बजा और वो मेरे कमरे के पास आकर बात करने लगा। मेरी माँ बिस्तर पर नंगी बैठी अपनी बुर को सहला रही थी जैसे उसे लण्ड चाहिए।

नारायण फ़ोन पर कह रहा था- माल तैयार है, बस आ जाओ !

मेरी माँ ने नारायण से पूछा- किसका फ़ोन है (more…)

यौन-आकांशाओं को पूरा

हेल्लो दोस्तो ! मेरा नाम प्रकाश है। मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ। मैं शादीशुदा आदमी हूँ। मेरी उमर ३० साल की हैं, २ बच्चे हैं। बच्चे होने के बाद से ही मेरी बीवी की सेक्स में दिलचस्पी कम हो गई थी, इस लिये मुझे बाहर लड़कियों से दोस्ती करनी पड़ी। २ साल पहले तक मेरा सिर्फ मेरी बीवी के साथ ही शारीरिक संबंध था लेकिन अब मेरी एक गर्लफ्रेंड भी बन गई है।

यह एक सच्ची कहानी है। इस कहानी को प्रकाशित करने की पीछे मेरा इरादा उन महिलाओं को सावधान करना हैं जो अपने पति को बच्चे होने के बाद वो सुख नहीं दी पाती और वो लोग अपने जरूरतों के लिये दूसरे रास्ते अपनाने को मजबूर हो जाते हैं। मैं भी उन्हीं में से एक हूँ।

एक बार मैं ६ बजे शाम को अपने ऑफिस से अपनी कार मैं घर आ रहा था, तभी एक लड़की ने मुझे लिफ्ट के लिए हाथ दिया। वो काफी सुंदर थी, ३४-२४-३४ उसका साइज़ होगा, कद भी पांच फ़ुट सात इंच होगा, काफी आकर्षक थी। मैं अपने आप को रोक नहीं सका और उसको लिफ्ट दे दी।

उसने अपना नाम पूजा बताया। वो भी गुड़गांव के एक कॉल सेण्टर में जॉब करती थी। बातों ही बातों में हम बहुत घुल मिल गए। ऐसा लगता था जैसे हमारी बहुत पुरानी दोस्ती हो ! उसने मुझे बताया कि उसका उसके पति से तलाक हो चुका हैं और वो अब अकेली ही रहती है। उसका एक बच्चा भी है जो बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है।

मैंने उससे कहा- मेरा और उसका ऑफिस टाइम एक ही है तो क्यों न वो मेरे साथ ही मेरी कार में चला करे। बस में बहुत भीड़ होती है।

उसने भी मुझे हाँ कह दिया। अब हम दोनों एक साथ ही आने जाने लगे, कभी अगर मैं लेट होता तो उसको फ़ोन कर देता, वो लेट होती तो मुझे फ़ोन कर देती।

एक दिन बारिश हो रही थी, वो रास्ते में मेरा इन्तजार कर रही थी, वो पूरी भीगी हुई थी। जैसे ही मैंने उसको देखा- मुझे एकदम करंट सा लग गया। वो बहुत ही सुंदर लग रही थी और शायद उसने भी मेरी नजरों को समझ लिया। वो कार में आ गई। वो बहुत घबराई सी लग रही थी, मेरी भी हालत ख़राब होती जा रही थी मेरा मन कर रहा था कि उसको पकड़ कर जोरदार किस कर लूँ लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी। मैं चुपचाप कार चलाने लगा। १० मिनट तक हम चुपचाप बैठे रहे, फिर वो बोली- क्या बात है, आप इतने चुप क्यों हो आज?

मैंने कहा- ऐसा तो कुछ नहीं, सब ठीक है। आज आप कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही हो ! इसलिये मेरी बोलती बंद हो गई !

और वो भी हस पड़ी, बोली- अच्छा ! इसका मतलब मैं और दिन सेक्सी नहीं लगती ?

मैंने गाड़ी रोक दी और उसके हाथों को अपने हाथों में लेकर कहा- मैंने तुम्हारी जैसी सेक्सी लड़की कभी नहीं देखी !

उसकी सांसें बहुत तेज हो गई थी, वो एकदम मेरे से लिपट गई और किस करने लगी। मैंने भी रास्ते के बीच में ही उसको किस करना शुरू कर दिया। वो भी एकदम हॉट हो गई थी। तभी पीछे गाड़ियों का जाम लग गया और उनके हॉर्न की आवाज से हम दोनों एकदम अलग हो गए। मैंने गाड़ी साइड में लगा ली। बारिश और काले शीशे होने की वजह से किसी को दिखाई नहीं दे रहा था कि अंदर क्या हो रहा है।

हम दोनों एक दूसरे को पागलों की तरह चूमने लगे। मैंने उसको टॉप उतार दिया और उसके स्तन चूसने लगा। वो भी मस्त हो कर मुझे अपने वक्ष की तरफ़ दबाने लगी। मैंने सीट सपाट कर दी और वो उस पर लेट गई। मैंने उसकी जींस भी उतार दी, गुलाबी चड्डी भी उतार दी।

मैं भी बिलकुल नंगा हो गया और उसको चूमने लगा। तभी वो बोली- कंडोम हैं?

मैंने कहा- यार ! मैं गाडी में कंडोम सेल तो नहीं करता !

तो बोली- फिर कुछ नहीं करेंगे !

मैंने कहा- रुको ! मैं अभी खरीद कर लाता हूँ !

मैंने कपड़े पहने और थोड़ी दूर पर ही एक मेडिकल स्टोर था, मैं वहाँ से एक पैकेट कंडोम लेकर आया। मेरे कपड़े भी भीग गए थे और मैंने कपड़े उतारे और उसको फिर चूमने लगा। मैंने उसकी चूत में अपनी ऊँगली करनी शुरू कर दी। वो भी एकदम गीली हो गई और पूरा मजा देने लगी और बोली- प्लीज़ ! मुझसे रुका नहीं जा रहा ! आप अंदर डाल दो !

मैंने भी ज्यादा देर करना उचित नहीं समझा और कंडोम लगा कर अपना लोड़ा उसकी गरम गरम चूत के अंदर डाल दिया और उसको जमकर चोदने लगा। वो भी चूतड़ उठा उठा कर चुदने लगी।

लगभग २० मिनट तक चोदने कई बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।

उस दिन के बाद हमने कई बार सेक्स किया। ओरल सेक्स भी किया। मैंने उसकी गांड भी मारी।

अब हम दोनों एक दूसरे की यौन-आकांशाओं को पूरा करते हैं और मस्त होकर अपनी जवानी का मजा ले रहे हैं।

यह एकदम सच्ची आपबीती है जो मैंने आज आपको बताई है।

बाबा डर लगता है

जब मैं जवान हुई तब मुझे भी और लड़कियों की तरह चुदवाने की इच्छा होती थी। पर हमारी सहेलियों में से एक के साथ प्रेग्नेन्सी का हादसा हो गया तब से मैं बहुत डर गई थी। वो पूरे कॉलेज में बदनाम हो गई थी और फिर उसने कॉलेज छोड़ दिया था। आजकल वो बंगलोर में पढ रही है और होस्टल में रह रही है। मैं इस हादसे के बाद से अपने हाथ से ही धीरे धीरे कर लेती थी।

मेरी सहेलियों ने मुझे अन्तर्वासना साईट बताई, तब से मैं रात को इसे अकेले में देखती हूँ और मेरे मन की इच्छा के ही अनुरूप इसमें उत्तेजक कहानियाँ पढ़ने को मिल जाती है। इसको पढ़ने से मेरी रातें रंगीन हो उठती हैं, हां कुछ देर तो मैं वासना में तड़पती रहती हूँ और फिर अंगुली घुसेड़ कर पानी निकाल लेती हूँ। सच में इसमें बड़ा सुख मिलता है। इसके लिये मैं अंतर्वासना को धन्यवाद देती हूँ।

मेरा बॉय फ़्रेन्ड अक्सर मुझे चुदवाने के लिये कहता है, पर डर के मारे मैं उसे मना कर देती हूँ। पर शायद उसे एक दिन मौका अन्जाने में मिल गया। घर में कोई नहीं था और विकास अचानक ही घर पर आ गया। उसे मैंने अन्दर बैठाया और उसकी मेहमानवाजी की।

पर जैसे ही उसे पता चला कि मैं घर में अकेली हूँ, उसने मुझे कहा ” स्वाति आओ, अकेलेपन का फ़ायदा उठा लें ! प्यार करें, किस करें, अभी यहाँ कौन है देखने वाला !”

मुझे भी लगा कि मौका अच्छा है कुछ थोड़ी चुम्मा-चाटी कर लें तो मजा आयेगा। मैं शरमा तो गई पर इन्कार नहीं कर पाई। मैं उसके पास बैठ गई और हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे। होठों को चूसने लगे। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस कर मुझे आनन्दित कर रही थी। मेरे बदन में उत्तेजना भी होने लगी थी। इसी बीच विकास का लण्ड खड़ा होने लग गया। लगता था वो भी उत्तेजित हो रहा था। सच है जब दो जवान तन आपस में मिलने लगे तो जिस्म जलेगा ही। मेरी चूंचियो में भी कड़ापन आने लगा था, दिल में कसक सी उठने लगी थी, मुझे अजीब सा भी लग रहा था कि मेरे स्तन अभी तक क्यूँ नहीं छू रहा था, क्या बात है … क्यूं नहीं दबा रहा है। मुझे तड़प सी होने लगी। मैंने तड़प के मारे उसका हाथ अपनी छाती पर रख लिया।

“विकास, आह दबा दो ना ! धीरे धीरे !”

उसने हल्का सा दबा दिया। मेरे शरीर में जैसे आग सी लग गई।

“जोर से … आह … !” अब उसने मेरे बोबे ही क्या मेरे पूरे शरीर को दबाना और मसलना आरम्भ कर दिया। मेरे मुख से सिसकारियाँ निकल पड़ी। मेरी चूत में से पानी चू पड़ा। उसने मेरे कुर्ते में नीचे से हाथ डाल दिया और जांघे सहलाता हुआ, चूत तक पहुंचने लगा। जैसे ही उसके हाथ ने मेरी चूत को छुआ मुझे एक झटका सा लगा। मेरा बदन पिघलने लगा। मेरी टांगें स्वत: ही खुलने लगी। हाथ को चूत तक पहुंचने का रास्ता देने लगी। जैसे ही उसके हाथ ने मेरी चूत को सहलाया, उसकी अंगुली मेरी चूत के रस से गीली हो गई। अंगुली का जोर लगते ही मेरी चूत का दाना छू गया, और अंगुली चूत के द्वार तक पहुंच गई। दाना छूते ही मेरे बदन में जैसे बिजलियां कौंध गई। मैं कांप गई। मैंने तुरन्त उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया। उसे सिर हिला कर मना किया।

“स्वाति, ये क्या ? मत रोको … क्या तुम्हें मजा नहीं आ रहा है ?”

उसके व्याकुल स्वर ने एक बार तो मुझे भी विचलित कर दिया। लगा कि चूत खोल कर उसका लण्ड भीतर समा लूँ। (more…)

जीजी ना कहा कर

बात उन दिनो की है जब मैं गयारहवीं कक्षा में पढ़ता था। हमारे पड़ोस में एक पंजाबी परिवार रहता था जिसमें सिरफ़ तीन ही सदस्य थे। एक 70 वर्षीय बुजुर्ग, एक लड़का और एक लड़की। लड़के की उमर लगभग 24-25 साल की रही होगी और लड़की की उम्र 20-21 साल की होगी। बुजुर्ग उन दोनों के पिता थे और अकसर बीमार से ही रहते थे। जबकि उन दोनों की माँ की मृत्यु हो चुकी थी। वैसे तो उस परिवार में 5-6 लड़कियाँ और भी थी लेकिन वो सब काफ़ी उमर की थी और सब की शादी हो चुकी थी और अपने पति के साथ अपनी ससुराल में ही रहती थी जो कि कभी-2 अपने पिताजी को देखने परिवार के साथ 2-3 दिन के लिये आती रहती थी। हमारा भी उस परिवार में काफ़ी आना जाना था।

लड़के का नाम राजेश और लड़की का नाम दीपाली था। दीपाली बहुत ही खूबसूरत थी। मैं राजेश को भाई साहब और दीपाली को जीजी कहता था। दीपाली का बदन मानो भगवान ने सांचे में ढाल कर बनाया हो। गोरा चिट्टा रंग हल्का गुलाबीपन लिये जैसे कि दूध में चु्टकी भर केसर डाल दी हो। शरीर 36-24-38। चूची एक दम सख्त और उभरी हुई और उसके चूतड़ भारी थे, लगता था कि उसके चूतड़ की जगह दो गोल बड़ी बड़ी गेंदें हो।

वो अधिकतर सलवार कुरता पहनती थी और जब चलती थी तो ऐसा मालूम होता था कि दो गेंद आपस में रगड़ खा रही हो। जब वो हंसती थी तो गालो में बड़े प्यारे गढ्ढे पड़ते थे जिस से वो और भी खूबसूरत लगने लगती थी। वोह बोलती बहुत थी और एक मिनट भी चुप नहीं बैठ सकती थी। उसमें एक खास बात थी कि वो किसी की भी चीज में कोई नुक्स नहीं निकालती थी चाहे उसको पसंद हो या ना हो। वो हमेशा यही कहती थी कि बहुत ही प्यारी है। यदि उसको कुछ खाने के लिये दो और वो उसको पसंद नहीं आई हो पर वो तब भी उसकी तारीफ़ ही करती कि बहुत ही स्वादिष्ट बनी है। इस बात की हम सब हमेशा ही दीपाली की तरीफ़ किया करते थे।

हमारी कालोनी के सभी लोग उसके दीवाने थे और एक बार बस उसको चोदना चाहते थे। मैं भी अकसर सोचता था कि काश मैं दीपाली को चोद सकूँ और एक दिन ऐसा मौका आ ही गया। सितम्बर का महीना चल रहा था। उस दिन रविवार था और सबकी छुट्टी थी और समय रहा होगा लगभग 11 बजे सुबह का। मैं किसी काम से अपनी छत पर गया था। हमारी दोनों की छत आपस में मिली हुई हैं और छत से उनके कमरे और बाथरूम बिलकुल साफ़ दिखाई देते हैं। तो उस रोज जब मैं छत पर गया तो दीपाली के गाने की आवाज आ रही थी सो मैं वैसे ही उनके घर की तरफ़ देखने लगा तो मैं चौंक गया कयोंकि दीपाली बिलकुल नंगी बाथरूम में पटरे पर बैठी थी और टाँगें चौड़ी कर रखी थी। (more…)

दीदी की गोरी गाण्ड

April 24, 2009

दोस्तों यह कहानी नहीं, एक सच्चाई है। यह कहानी खासकर लड़कियों और महिलाओं को ज्यादा पसन्द आयेगी।

मेरी उम्र २६ साल है। कई साल पहले की बात है तब मेरी एक सगी बुआ की लड़की रेखा उस समय १९ साल की थी। वह अक्सर मुझे अपने घर ले जाया करती थी। मेरे घरवाले सब इसलिए अनुमति दे देते थे क्योंकि उसके कोई भाई नहीं था।

मैं उसे बहन की तरह ही प्यार करता था। लेकिन उसके दिल में कुछ छिपा था। एक दिन मैं साइकिल चला रहा था कि अचानक मेरे आँड दब गये। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। बुआजी और २ बहनें एक शादी में गई थीं। जब मुझसे नहीं रहा गया तो मैंने रेखा दीदी को बताया। दीदी ने मेरी पैन्ट व अन्डरवीयर खोलने को कहा।

पहले तो मैं शरमाया परन्तु फिर मैंने खोल दिया। दीदी ने आयोडेक्स मेरी गोलियों पर लगाना शुरू किया और कभी कभी मेरे लन्ड को भी छू देती थी मुझे चिढ़ाने के लिए। दीदी का हाथ लगते ही वह अपने पूरे आकार में आ गया आखिर दीदी ने बोल ही दिया- बाप रे ! कितना बड़ा है।

उसके तीन दिन बाद एक दिन मैंने दीदी को झाँट साफ करते देख लिया। वे रेजर से साफ कर रहीं थी। मैं शरमाकर पीछे हट रहा था लेकिन दीदी ने कहा कि इधर आ। मुझे तेरा सामान देखकर शर्म नहीं आई थी, तू क्यों शरमा रहा है?

और उन्होंने रेजर मुझे दे दिया। फिर मैंने दीदी की बगलें तथा झाँटे साफ की। दीदी की गोरी गाण्ड व गुलाबी चूत देखकर अचानक मेरे लण्ड से भी कुछ रिसने लगा।

जब मैं रेजर चला रहा था दीदी बार बार मेरी पैन्ट में टाइट लण्ड को निहार रही थी। मैंने कुछ करना चाहा। तभी दीदी ने मन में कुछ सोच कर कहा- रात को।

उसी दिन से दीदी रात को अपने साथ सुलाने लगी थीं। एक दिन रात को उन्होने अपना एक हाथ मेरे सिर के नीचे डाल लिया और फिर करवट बदलकर मुझे अपने ऊपर कर लिया। मैं सोने का नाटक करता रहा। (more…)

भाभी बोली- चोदना शुरू कीजिये ना

उस समय तक मेरे लण्ड पर बाल उग आए थे। मैं अक्सर रात को अपने बिस्तर पर नंगा लेट कर अपने लण्ड के बालों को सहलाया करता था एवं अपने लण्ड को खड़ा कर उसे सहलाता रहता था।

एक रात मैं अपने लण्ड को सहला रहा था। उसमे मुझे बहुत आनंद आ रहा था। अचानक मैंने जोर जोर से अपने लण्ड को अपने हाथ से रगड़ना शुरू किया। मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लग रहा था। अचानक मेरे लण्ड से मेरा माल निकलने लगा। उत्तेजना से मेरी आँखे बंद हो गई। ५-६ मिनट तक मुझे होश ही नहीं रहा। ये मेरा पहला मुठ था। इसके पहले मुझे इसका कोई अनुभव नहीं था। मैंने बाथरूम में जा कर अपने लण्ड को धोया और बिस्तर पे आया तो मुझे गहरी नींद आ गई।

अगली सुबह मैं अपने कमरे से बाहर निकला तो देखा कि भइया अपने ऑफिस के लिए तैयार हो रहे हैं। उनकी शादी हुए २ साल हो गए थे। भाभी मेरे साथ बहुत ही घुली मिली थी। मैं अपनी हर प्रोब्लम उनको बताया करता था। मेरे माता-पिता भी हमारे साथ ही रहते थे। थोड़ी देर में भईया अपने ऑफिस चले गए। पिता जी को कचहरी में काम था इस लिए वो १० बजे चले गए। मेरे पड़ोस में एक पूजा का कार्यक्रम था सो माँ भी वहां चली गई। (more…)

भैया की मर्ज़ी से भाभी को चोदा

हेल्लो दोस्तो ! मेरा नाम सैंडी है और मैं बंगलोर में रहता हूँ। मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सी सेक्सी कहानियाँ पढ़ी हैं। उन्हें पढ़ने के बाद मुझे लगा कि मुझे भी अपनी कहानी सभी लोगों को बतानी चाहिए।

वैसे तो मेरा घर दिल्ली में है पर अब से दो साल पहले ही मेरा तबादला बंगलोर में हो गया था। मेरी उम्र २७ साल है और मेरा रंग गोरा, सुडोल शरीर है और मेरा लण्ड ८’’ लम्बा और २.५ ’’ मोटा है। मेरे घर (दिल्ली)में मेरी मॉम, डैड, मेरे बड़े भैया और भाभी जी रहते हैं।

अब मैं सीधे कहानी पर आता हूँ, मैं एक बहुत ही सेक्सी किस्म का इन्सान हूँ।

ये कहानी मेरी और मेरी भाभी की है। अब से ६ साल पहले की बात है।

मुझे नग्न काम-कला वाली फिल्मों का बहुत शौक है। उस समय मैं रोज एक मूवी लाता था और देख कर मुठ मारता था। ये बात शायद मेरी भाभी को पता चल गई थी। एक बार मेरे मॉम डैड कुछ काम से १ महीने के लिए हमारे गाँव गए हुए थे। मैं रोज़ रात को सेक्सी मूवी देखने के बाद मुठ मर के ही सोता था। हमारा घर दो मंजिला है, मैं और मेरे भैया भाभी दूसरी मंजिल पर रहते थे और मेरा कमरा भाभी के बाजू में ही था।

एक रात को मैं मूवी देख रहा था तो मेरे को लगा कि कोई मेरे कमरे में झांक रहा है मैं देखने के लिए जैसे ही बाहर आया तो मैं अपनी भाभी को अंदर कमरे में जाते देखा। मैंने देखा कि भाभी ने कमरे का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला ही छोड़ दिया और खिड़की भी खोल दी। फिर मैं छुप कर देखने लगा कि अन्दर क्या हो रहा है।

तब मैंने देखा कि भैया सो रहे थे और भाभी ने उनकी लुंगी खोल कर उनका लण्ड चूसना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद उन्होंने एक एक करके अपने सभी कपड़े खोल दिए और नंगी हो गई और मेरी तरफ अपनी गांड करके बड़े ही सेक्सी ढंग से भैया का लण्ड चूसने लगी। फ़िर थोड़ी देर बाद भैया के ऊपर चढ़ कर अपनी चूत में लण्ड डाल कर बड़े सेक्सी ढंग से ऊपर नीचे होने लगी और पीछे मुड़ कर मुझे देखने लगी और जोर जोर से सीत्कार करते हुए भैया से चोदने के लिए कहने लगी।

तब मैं समझ गया कि भाभी मुझे ही यह सब दिखा रही हैं। भैया नीचे से जोर लगा कर भाभी को चोदने लगे, भाभी मेरी तरफ़ बड़े सेक्सी तरीके से देख रही थी। थोड़ी ही देर में भैया झड़ गए और भाभी को बोलने लगे- अब बस कर !

तब मैंने देखा कि भाभी प्यासी ही रह गई।

भाभी ने भैया से कहा- मैं हमेशा प्यासी ही रह जाती हूँ !

तो भैया उन्हें प्यार से बोले- जानू ! मैं क्या करूँ?

तभी भैया को ना जाने क्या ख्याल आया और बोले- तू सैंडी से क्यों नहीं सम्बंध बना लेती।

भाभी पहले गुस्से में बोली- तुम्हारा दिमाग तो ठीक है?

फ़िर भैया के जोर देने पर मान गई। मैं यह सब खिड़की पर खड़ा सुन रहा था। मैं अपने कमरे में जाकर लेट गया, काफ़ी देर बाद मुझे नींद आई। सुबह जब मैं उठा तो आठ बज चुके थे और भैया ऑफिस जाने को तैयार थे, तब भैया बोले कि सैंडी आज तुम कॉलेज नहीं जाना घर का थोड़ा ख्याल रखना, तुम्हारी भाभी की तबियत कुछ ख़राब है !

मैं हाँ बोला और नहाने चला गया। उसके बाद जब मैं तैयार हो कर नाश्ता कर रहा था तो भाभी बहुत ही सेक्सी गाऊन पहन कर आई। उन्हें देख कर और रात की बात याद कर के मेरा लण्ड खड़ा होने लगा पर मेरी हिम्मत नहीं हुई और भाभी भी मुझे कुछ नहीं बोल पाई।

इस तरह दोपहर के दो बज गए।

तब भाभी ने मुझे कहा- मेरे सर में दर्द हो रहा है। क्या तुम मेरे विक्स लगा दोगे?

मैं बोला- जी भाभी ! (more…)

भाई से चुदाई

अपने भाईयो का लण्ड लेने वाली मेरी प्यारी बहनो और अपनी बहनो की गांड मारने वाले मादरचोद भाईयो !

कैसे हैं आप?

उम्मीद करती हूँ कि आप अपने घर में चोदने के काम में पूरी तरह से लगे हुए हो।

मेरा नाम अंकिता है और मैं चोदपुर ओह ! सॉरी ! जोधपुर में रहती हूँ। मेरी पिछली कहानी पर मुझे काफी मेल आये और मैंने सबके जवाब दिए। आपने मेरी अभी तक सभी कहानियाँ पढ़ी होगी और मुझे अपने ख्यालो में बुलाकर और सोच कर बहुत सोच कर मुट्ठ मारते होंगे और मुझे चोदते होंगे। आप सब लोग इसी तरह मेरी कहानियाँ पढ़ा कीजिये और मेरा नाम लेकर मुठ मारा कीजिए।

खैर मैं सारी बातों को छोड़कर अपनी असली औकात मतलब कहानी पर आती हूँ।

मेरा फिगर ३२-२८-३४ है और किसी वजह से छोटी उम्र में ही सैक्स की तरफ ज्यादा ध्यान देने लगी। वैसे तो मेरा स्थाई घर जयपुर में है लेकिन मैं जोधपुर में मेरे भाई के साथ रहती हूँ। मै और मेरा भाई लगभग रोज चुदाई करते है। अब तो ये हाल है कि मैं दिन में एक बार जब तक भाई से चुद नहीं लेती मुझे नींद नहीं आती है। मैंने अपने भाई के अलावा किसी और से चुदाई नहीं की है।

मेरे भाई का नाम अंकित है। जब उसने मुझे पहली बार चोदा तो मेरी उम्र १८ साल थी। लेकिन उस उम्र में भी मैं जवान औरतों को मात दे रही थी। मेरे स्तनों का आकार तो सामान्य ही था लेकिन थे बहुत ही टाईट व तीखे। मेरा फिगर देखकर बड़े लोगों व बूढ़े लोगों का भी लण्ड खड़ा हो जाता था।

जब मैं कक्षा १० में थी तो तभी मैं और भईया अलग जोधपुर में रहने लग गये थे। भईया ने मुझे बड़े प्यार से पाला था।

एक दिन स्कूल से आकर मैने भईया से कहा- भईया स्कूल के वार्षिक फंक्शन में मैंने डांस करना है और ड्रेस कोड साड़ी है इसलिये मुझे साड़ी पहन कर जाना होगा, लेकिन मुझे साड़ी पहनना नहीं आता है और मेरे पास कोई अच्छी साड़ी भी नहीं है।

तो भईया कहा- अपनी नई साड़ी पहन लो !

मैंने कहा- हाँ ! लेकिन ब्लाउज और पेटीकोट तो मुझे नहीं आयेगे !

भईया ने कहा- ठीक है तेरे लिये बाजार से नया ब्लाउज और पेटीकोट ले आउँगा।

मैने कहा- ठीक है भईया ! पर पहले आप मुझे साड़ी पहनना सिखा दीजिये। जिस पर भईया ने मुझको साड़ी लाने को कहा। तो मै भाग कर कमरे में गई और साड़ी लेकर आई। मैंने उस समय टी-शर्ट और जीन्स पहन रखी थी। मैने अपना टी-शर्ट उपर कर दिया तो मेरा गोरा पेट भईया की आंखो के सामने था। मेरा गोरा पेट देखकर भईया की आंखो में वासना चमकने लगी, उसके मन में बुरे बुरे ख्याल आने लगे। उसने धीरे से मेरे पेट पर हाथ फिराया तो मैं हंसने लगी।

भईया ने कहा- हंस क्यो रही हो?

मैं बोली- कुछ नहीं ! ऐसे ही ! गुदगुदी हो रही है।

भईया ने मेरे कमर पर साड़ी लपेटी लेकिन कपड़े पहने होने के कारण साड़ी मेरे बदन पर ठीक नहीं हो पा रही थी।

भईया ने मुझे कहा- अंकिता ! तुम अपने कपड़े, अपनी पैन्ट उतारो !

मैने कहा- क्यों?

तो भईया ने कहा- इसलिये, क्योंकि साड़ी ठीक से नहीं आ पा रही है।

तो मैंने अपनी पैन्ट उतार दी। उस समय मैने गुलाबी रंग की पेन्टी पहनी थी। मै अपने भाई के सामने पेन्टी में थी।

मैंने कहा- जल्दी करो ना ! मेरे हाथ दुख रहे हैं क्योंकि मैं अपने हाथो से अपना टी-शर्ट उपर किये हुए खड़ी थी।

भईया ने मुझे कहा- तुम अपना टी-शर्ट उतार दो तो मै तुम्हें साड़ी पहना सिखाउंगा।

तो मैने अपने बटन को खोल कर टीशर्ट उतार दिया। अब मैं केवल ब्रा और पेन्टी में ही थी। भईया खड़ा रह कर मेरे बदन के आस पास साड़ी लपेटने लगा। भईया का हाथ मेरे बदन पर बार बार छू रहा था। जैसे तैसे भईया मुझे साड़ी पहनाई। फिर भईया ने कहा- देखो अंकिता जाकर आईने में ! साड़ी ठीक से बन्धी है या नहीं।

मै अपने कमरे में गई तथा आईने में अपने आप को देखने लगी। जब भईया बेडरूम में आया तो मै केवल ब्रा और पेन्टी में थी तथा केवल एक साड़ी लपेटे हुए थी।

तभी भईया ने मुझे कहा- अंकिता ! अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात कहूं? तुम्हारा एक स्तन छोटा और एक बड़ा है।

तो मैं गौर से देखने लगी, फिर बोली- नहीं दोनों बराबर हैं ! मैने अपना साड़ी का पल्लू हटा कर दिखाया।

तो भईया ने कहा- नहीं तुम्हें साड़ी पहनकर दिखाई नहीं दे रहा है।

मैने कहा- इससे क्या होगा?

तो भईया ने मुझे कहा- ये परेशानी तुमको तुम्हारी शादी के बाद आयेगी, जब तुम्हारा पति तुम्हारे दोनों स्तन बराबर नहीं पायेगा तो बड़ा नाराज होगा, और हाँ इससे तुम्हारी खूबसूरती भी कम हो जायेगी।

तो मैने कहा- भईया !अब मैं क्या करूँ? ये ठीक नहीं हो पायेंगे क्या?

भईया ने कहा- ठीक तो हो जायेगे लेकिन तुम्हें कहे अनुसार इलाज करना पड़ेगा और इसका इलाज केवल मालिश के द्वारा ही होगा।

तो मैने भईया से कहा- भईया ! आप प्लीज इसे ठीक कर दीजिये ना !

तो भईया ने मुझे कहा- अंकिता ! तुम एक काम करो तुम साड़ी उतार कर बिस्तर पर लेट जाओ, मैं तुम्हारी अभी मालिश कर देता हूँ।

फिर मैं अपनी साड़ी उतार कर बिस्तर पर लेट गई। भईया ने अलमारी में से तेल की शीशी निकाली और बिस्तर पर मेरे पास आकर बैठ गया और कहा- तुम अपनी ब्रा उतार दो, नहीं तो तेल से खराब हो जायेगी।

मैने जल्दी से अपनी ब्रा को उतार दिया और अब मै मेरे भईया के सामने केवल पेन्टी में ही थी। भईया ने अपने हाथ में तेल ले कर फिर मेरे स्तनों पर लगाया और मेरे स्तनों की मालिश करने लगा। मैं अपनी आंखों को बंद किये हुए लेटी थी। भईया मेरे कच्चे और हल्के गुलाबी रंग के स्तन व उनके चूचुकों को मसल रहा था। पहली बार किसी लड़के ने मेरे स्तनों को हाथ लगाया था और वह मालिश कर रहा था। इस कारण से मुझे अजीब सा नशा छाने लगा।

तभी भईया ने मेरे गुलाबी चूचुक को अपने अंगूठे व उंगली के बीच में लेकर जोर से दबा दिया तो मै जोर से बुरी तरह चिल्ला उठी और बोली- आ आआ हहहहहहहह भईया इतनी जोर से नहीं ! आराम से !

इसके बाद तो मै अपने होश खोती जा रही थी तथा आसमान में उड़ने लगी थी लेकिन मेरा कोई गलत काम का मन नहीं था। लेकिन भईया मुझको पूरी तरह तैयार करके चोदने में मूड में था। करीब २० मिनट मालिश करने के बाद भईया ने मुझे कहा- अंकिता तुम्हारे स्तन अभी थोड़े ठीक हुए हैं लेकिन अगर तुम बुरा न मानो तो मैं तुम्हारी पूसी भी देख लूँ ताकि उसमें भी कोई परेशानी तो नहीं है।

तो मैने कहा- इसमें पूछने की कोई बात नहीं ! आप मेरे भईया है आप मेरा बुरा थोड़े ही करेंगे।

भईया उस समय भी कपड़े पहने हुए थे। मैने देखा कि भईया के कपडो पर भी तेल लग गया है। भइया उठे और अपने कपड़े निकाल दिये। मैने पूछा तो कहा कि मेरे कपड़ों पर तेल लग गया है, बदलने है। अब भईया मेरे सामने सिर्फ अन्डरवीयर में थे।

मैने भईया से कहा- भईया ! आप अपना अण्डरवीयर निकाल दो, नहीं तो ये भी गन्दा हो जायेगा।

तो भईया ने जल्दी से अपनी अण्डरवीयर उतार दी। भईया का लण्ड में लहराने लगा तो मैने भईया से पूछा- ये क्या है?

तो उसने कहा- यह लन्ड है और अंग्रेजी में इसको पेनिस कहते है और हम दोनो इसी पेनिस की वजह से इस दुनिया में आये हैं।

मैने पूछा- इससे क्या होता है?

भईया ने कहा- इससे चूत की शेप और साईज ठीक किया जाता है।

तो मैने मासूमियत से कहा- भईया ! क्या आप मेरी चूत की शेप भी ठीक करेंगे?

वह बोला- हाँ ! लेकिन पहले मैं यह देख तो लूँ कि तुम्हारी चूत ठीक है भी या नहीं ? (more…)

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